अल्मोड़ा हल्द्वानी से 87 किमी दूर है और NH109 पर भवाली, गरमपानी और खैरना होते हुए करीब 3 घंटे लगते हैं। यहाँ पढ़ें कि रास्ता किस क्रम में चलता है, 2026 में कैब का किराया कितना है, बस और शेयर्ड सूमो के क्या विकल्प हैं, और अल्मोड़ा को ठीक से देखने के लिए कहाँ ठहरें।
छोटा जवाब: अल्मोड़ा हल्द्वानी से NH109 पर भवाली, गरमपानी और खैरना होते हुए 87 किमी दूर है, और किसी शांत कामकाजी दिन की सुबह यह 3 घंटे का सफ़र है। सेडान कैब का एक तरफ़ का किराया Rs 3,200 से 3,800 और Innova का Rs 4,200 से 4,800 है। उसी दिन लौटना हो और अल्मोड़ा में 4 घंटे रुकना हो, तो सेडान का खर्च Rs 5,200 से 6,800 आता है। ज़्यादातर लोग अल्मोड़ा में 2 से 3 रातें रुकते हैं और हल्द्वानी को सिर्फ़ ट्रेन से उतरने की जगह मानते हैं, क्योंकि अल्मोड़ा को आराम से देखने में ही मज़ा है। इस रास्ते पर सफ़र का समय सबसे ज़्यादा भवाली बाज़ार का जाम तय करता है, जो सुबह 9 से पहले और शाम 7 के बाद हल्का रहता है। इस पूरे इलाके की जानकारी के लिए हमारी हल्द्वानी ट्रैवल गाइड देखें।
हल्द्वानी से अल्मोड़ा जाने का असल में एक ही सही रास्ता है। आप NH109 पर उत्तर की ओर काठगोदाम से निकलते हैं, भीमताल के मोड़ से आगे भवाली पहुँचते हैं, फिर गरमपानी से कोसी नदी के किनारे-किनारे उतरकर खैरना आते हैं, और वहाँ से घुमावदार चढ़ाई चढ़कर अल्मोड़ा की पहाड़ी पर पहुँचते हैं। पूरा रास्ता 87 किमी का है और किसी शांत कामकाजी दिन की सुबह 2 घंटे 50 मिनट लगते हैं। भवाली तक यही NH109 मुक्तेश्वर और नैनीताल भी ले जाता है; भवाली में तीनों रास्ते अलग हो जाते हैं।
हल्द्वानी से काठगोदाम, किमी 0 से 5। यह कालाढूंगी चौराहा और रामपुर रोड से होकर जाने वाली आम शहरी सड़क है, जिस पर सिग्नल और काठगोदाम का रेलवे फाटक पड़ता है। सुबह 7 से 8 बजे के बीच निकलें तो 15 मिनट लगते हैं, और 9 बजे के बाद 25 मिनट। अगर उसी समय शताब्दी काठगोदाम पहुँच रही हो, तो फाटक पर 5 से 8 मिनट और रुकना पड़ सकता है।
काठगोदाम से भीमताल मोड़, किमी 5 से 22। NH109 रानीबाग और छोटी मुखानी से होते हुए धीरे-धीरे चढ़ता है। दो लेन की अच्छी सड़क है और करीब 25 मिनट लगते हैं। भीमताल जंक्शन पर ही तय करना होता है कि किस रास्ते से जाएँ: दाहिनी सड़क NH109 पर भवाली जाती है, और बाईं सड़क 9 किमी दूर भीमताल झील।
भीमताल मोड़ से भवाली, किमी 22 से 33। पहाड़ शुरू होते ही सड़क संकरी होने लगती है और इस हिस्से में 20 से 25 मिनट लगते हैं। 28 किमी पर गढ़वाल मेस और भवाली हाईवे कैफ़े हैं, जहाँ चाय और आलू पराठा मिल जाता है।
भवाली बाज़ार, किमी 33 से 35। सबसे ज़्यादा समय यहीं लगता है। भवाली बाज़ार फल मंडी और दुकानों की 2 किमी लंबी पट्टी है, जहाँ सड़क एक लेन की रह जाती है और खड़े ट्रक रफ़्तार रोक देते हैं। सुबह 9 बजे से पहले भवाली 6 मिनट में पार हो जाता है, लेकिन सुबह 10 से शाम 6 बजे के बीच इसी हिस्से में 18 से 25 मिनट लगते हैं। अल्मोड़ा के लिए भवाली के तिराहे पर बाईं ओर रहें, क्योंकि दाहिनी सड़क मुक्तेश्वर जाती है। नीम करोली बाबा का कैंची धाम आश्रम इसी सड़क पर भवाली से 17 किमी आगे है और थोड़ी देर रुकने लायक है; पूरी जानकारी हमारी कैंची धाम गाइड में है।
भवाली से गरमपानी होते हुए खैरना, किमी 35 से 60। पूरे रास्ते का यह सबसे तेज़ हिस्सा है। सड़क भवाली की पहाड़ी से उतरकर गरमपानी (44 किमी) में कोसी नदी तक आती है, फिर पॉपलर और चीड़ की घाटी में नदी के साथ उत्तर की ओर खैरना (60 किमी) तक जाती है, जहाँ सुयाल नदी कोसी से मिलती है। औसत रफ़्तार 40 किमी प्रति घंटा रहती है और 40 से 45 मिनट लगते हैं। गरमपानी में नदी किनारे बैठने की जगह वाले 5-6 ढाबे हैं, और आलू के गुटके और मडुआ रोटी के लिए स्थानीय लोग महेश ढाबे को पसंद करते हैं।
खैरना से अल्मोड़ा, किमी 60 से 87। असली चढ़ाई यहीं से शुरू होती है। खैरना पुल पर सड़क कोसी को छोड़ देती है और जंगल के बीच घुमावदार मोड़ों से 1,000 मीटर ऊपर चढ़कर 1,651 मीटर ऊँची अल्मोड़ा की पहाड़ी पर पहुँचती है। इसमें 55 मिनट लगते हैं और औसत रफ़्तार 28 किमी प्रति घंटा रहती है। आख़िरी 4 किमी अल्मोड़ा बाईपास पर चलते हैं। ड्राइवर से कहें कि आपको LR Sah Road जंक्शन के पास उतारे, जहाँ से बाज़ार और माल रोड पास हैं; बाईपास के गोल चक्कर पर न उतरें, वहाँ से हर जगह 2 किमी दूर है।
हल्द्वानी और अल्मोड़ा के बीच के 87 किमी में सफ़र का समय सबसे ज़्यादा भवाली बाज़ार की 2 किमी की पट्टी तय करती है, मौसम और वीकेंड की भीड़ से भी ज़्यादा। बाज़ार NH109 के ठीक किनारे है और 2026 के मध्य तक कोई बाईपास नहीं खुला है। सुबह 9 बजे से फल मंडी सड़क तक फैल जाती है, खड़े टेम्पो और माल उतारते ट्रक गाड़ियों को एक लेन में धकेल देते हैं, और मुक्तेश्वर की ओर से आने-जाने वाली गाड़ियाँ जाम और बढ़ा देती हैं।
कब रास्ता खाली मिलता है। सुबह 9 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद भवाली 6 मिनट में पार हो जाता है। हल्द्वानी से 7:30 बजे निकलें तो 8:20 बजे तक भवाली पहुँच जाएँगे, जब बाज़ार खाली ही होता है।
कब न जाएँ। शनिवार और रविवार को सुबह 11 से शाम 5 बजे के बीच सबसे बुरा हाल रहता है। शुक्रवार शाम 5 से 8 बजे के बीच दिल्ली से वीकेंड मनाने आने वालों की भीड़ रहती है। मंगलवार सुबह भी जाम रहता है, क्योंकि थोक मंडी में फलों की साप्ताहिक नीलामी होती है और किसानों के ट्रक सड़क पर आ जाते हैं।
रुकना हो तो कहाँ रुकें। अगर आप 9 बजे से पहले भवाली पार कर चुके हैं और थोड़ी देर और रुक सकते हैं, तो 11 किमी आगे गरमपानी जाकर कोसी किनारे किसी ढाबे पर रुकें। भवाली में गाड़ी खड़ी करना मुश्किल है, जबकि गरमपानी में आसान, इसलिए वहाँ का 5 मिनट का पड़ाव कम समय खाता है।
इस सफ़र के लिए कैब तीन तरह से मिलती है, और तीनों जगह एक ही सफ़र का किराया अलग बताया जाता है।
हल्द्वानी के टैक्सी स्टैंड पर लोकल यूनियन रेट। सेडान का एक तरफ़ का किराया Rs 3,200 से 3,500 और Innova का Rs 4,200 से 4,500 है। मंगल पड़ाव स्टैंड और तिकोनिया के रोडवेज़ बस अड्डे के कैब काउंटर पर यही रेट चलता है। अगर ड्राइवर को शाम 7 बजे के बाद लौटना पड़े तो वह Rs 400 से 600 ज़्यादा माँग सकता है, और कैंची धाम पर रुकने के Rs 200 अलग।
काठगोदाम जंक्शन का प्रीपेड काउंटर। सेडान का एक तरफ़ का किराया Rs 3,500 से 3,800 और Innova का Rs 4,500 से 4,800 है। शहर के रेट से Rs 400 से 600 ज़्यादा देकर आपको काउंटर की रसीद मिलती है और ट्रेन पहुँचने के 15 मिनट के अंदर प्लेटफ़ॉर्म पर ड्राइवर मिल जाता है। रानीखेत एक्सप्रेस या शताब्दी से उतरकर टैक्सी स्टैंड तक पैदल न जाना हो, तो यह पैसा वसूल है।
ऑनलाइन कैब बुकिंग साइटें। सेडान का एक तरफ़ का किराया Rs 3,800 से 4,600 और Innova का Rs 4,800 से 5,800 है। बुकिंग ऐप कमीशन लेते हैं, इसलिए उनका किराया लोकल रेट से 15 से 25 प्रतिशत ज़्यादा होता है। कंपनी से पैसा वापस लेने के लिए डिजिटल बिल चाहिए, तभी इनसे बुक करें।
उसी दिन आना-जाना, अल्मोड़ा में 4 घंटे रुककर। सेडान का किराया Rs 5,200 से 6,800 और Innova का Rs 6,800 से 7,800 है। सही किराया एक तरफ़ के किराए का लगभग 1.6 गुना होता है, 2 गुना नहीं, क्योंकि ड्राइवर इंतज़ार के समय का आधा किराया ही जोड़ता है। कोई 2 गुना माँगे तो मोलभाव करें। अगर अल्मोड़ा में एक रात रुककर अगले दिन सुबह 9 बजे लौटना हो, तो 2 दिन का यह सफ़र सेडान में Rs 7,500 से 9,000 का पड़ता है, जिसमें ड्राइवर के रात के Rs 400 से 600 शामिल हैं।
हल्द्वानी में कैब किराए पर लेने और उन पाँच ऑपरेटरों के बारे में, जिनके नंबर फ़ोन में रखने लायक हैं, हमारी हल्द्वानी कैब सर्विस गाइड पढ़ें।
इनमें से कोई भी पड़ाव सफ़र में 30 मिनट से ज़्यादा नहीं जोड़ता, और इनके साथ लंबा सफ़र भी मज़ेदार बन जाता है।
भीमताल झील का व्यूपॉइंट, किमी 22, 10 मिनट। भीमताल मोड़ पर बाईं सड़क से 1.5 किमी नीचे झील के ऊपर बने हाईवे व्यूपॉइंट तक जाएँ। बाज़ार में घुसे बिना ऊपर से पूरी भीमताल झील दिख जाती है। वहाँ पूरा दिन बिताना हो तो हमारी भीमताल डे ट्रिप गाइड देखें।
कैंची धाम, किमी 50, 20 से 40 मिनट। नीम करोली बाबा का आश्रम अल्मोड़ा रोड पर भवाली से 17 किमी आगे, कोसी नदी के किनारे है। यह सुबह 7 से शाम 6 बजे तक खुलता है और कुछ दिनों में दोपहर को बंद रहता है। गाड़ी नीचे वाली पार्किंग में खड़ी करके पैदल अंदर जाएँ। कामकाजी दिन की शांत सुबह जाना सबसे अच्छा है, वीकेंड पर भीड़ रहती है।
गरमपानी में कोसी किनारे का ढाबा, किमी 44, 15 मिनट। नदी किनारे के किसी ढाबे पर रुककर चाय, आलू पराठा या भांग की चटनी के साथ पहाड़ी मडुआ रोटी खाएँ। महेश ढाबा पुराना और जाना-माना है, जबकि अन्नपूर्णा ढाबे की रसोई ज़्यादा साफ़ है। दोनों में नदी किनारे सादी बैठने की जगह है।
खैरना संगम, किमी 60, 10 मिनट। यहाँ कोसी और सुयाल मिलती हैं, उस पुल से ठीक पहले जहाँ से सड़क चढ़ाई की ओर मुड़ती है। खैरना के छोटे बाज़ार में एक देवी मंदिर है और पानी-पूरी का एक ठेला शाम तक लगा रहता है। अल्मोड़ा की 27 किमी की चढ़ाई से पहले पैर सीधे करने की यह आख़िरी अच्छी जगह है।
22 किमी पर भीमताल मोड़ से आप NH109 छोड़कर बाईं ओर 9 किमी दूर भीमताल जा सकते हैं, सात झीलों वाले सातताल का पूर्व की ओर से चक्कर लगा सकते हैं, और भवाली के आगे कैंची धाम के पास फिर अल्मोड़ा रोड पकड़ सकते हैं। इस रास्ते में 14 किमी (कुल 101 किमी) और 40 मिनट (कुल 3 घंटे 30 मिनट) ज़्यादा लगते हैं, लेकिन भवाली बाज़ार का जाम पूरी तरह बच जाता है।
यह रास्ता कब लें। शनिवार और रविवार को सुबह 11 से शाम 5 बजे के बीच, जब भवाली बाज़ार मुख्य रास्ते पर 20 से 25 मिनट बढ़ा देता है। पहुँचते आप लगभग उसी समय हैं, पर सफ़र कहीं ज़्यादा सुकून भरा रहता है। अगर एक ही दिन में भीमताल, सातताल और कैंची धाम देखने हों, तब भी यही रास्ता ठीक है।
NH109 पर कब रहें। किसी भी कामकाजी दिन सुबह 9 बजे से पहले भवाली 6 मिनट में पार हो जाता है और मुख्य रास्ता सचमुच तेज़ पड़ता है। रोडवेज़ बस या काठगोदाम की प्रीपेड कैब से जा रहे हों, तब भी यही रास्ता है, क्योंकि दोनों सिर्फ़ NH109 से चलती हैं।
तिकोनिया से उत्तराखंड रोडवेज़ की बसें। तिकोनिया चौराहे पर हल्द्वानी के रोडवेज़ बस अड्डे से रोज़ पाँच से सात बसें जाती हैं। सीज़न में सुबह 05:30 वाली पहली बस सबसे अच्छी है: यह 9:45 तक अल्मोड़ा पहुँचा देती है, जब ब्राइट एंड कॉर्नर पर घूमने के लिए सुबह की रोशनी बनी रहती है। बाकी भरोसेमंद बसें लगभग 07:00, 09:30, 11:30, 14:00 और 16:30 बजे चलती हैं, और गर्मियों के वीकेंड पर 18:00 बजे आख़िरी बस और लगती है। एक तरफ़ का किराया Rs 220 से 280 है। बसें बिना AC की साधारण या सेमी-डीलक्स होती हैं, सीटें सख़्त होती हैं और भवाली में 10 मिनट रुकती हैं। 16:30 के बाद की बस अल्मोड़ा अंधेरा होने के काफ़ी बाद पहुँचती है, इसलिए पहली बार इस सड़क पर जा रहे हों तो उससे बचें।
काठगोदाम से शेयर्ड सूमो। रेलवे स्टेशन के गेट से 50 मीटर दूर काठगोदाम के सूमो स्टैंड से दिन भर अल्मोड़ा के लिए Tata Sumo चलती हैं। एक सीट का किराया Rs 220 है, और 8 या 10 सीटें भरते ही गाड़ी चल देती है, जो भीड़ वाली सुबह में हर 25 मिनट पर होता है। सूमो भवाली में नहीं रुकती, इसलिए बस से जल्दी पहुँचाती है, और निजी कैब से सस्ती भी है। बदले में पैर फैलाने की जगह लगभग नहीं मिलती और अनजान लोगों के साथ बैठना पड़ता है, जो अकेले सफ़र करने वालों और बैकपैकरों के लिए ठीक है।
बस का टिकट। कामकाजी दिनों में तिकोनिया काउंटर पर सीधे टिकट मिल जाता है। सीज़न में शुक्रवार और शनिवार के लिए एक शाम पहले बुक करें, क्योंकि 05:30 और 07:00 की बसें पिछली रात 9 बजे तक भर जाती हैं। उत्तराखंड रोडवेज़ का ऐप एडवांस बुकिंग के लिए UPI से भुगतान लेता है, पर उसमें सीट चुनने की सुविधा अक्सर ठीक से काम नहीं करती।
अगर 2 से 3 दिन की कुमाऊँ यात्रा में अल्मोड़ा ही मुख्य जगह है, तो सीधी सलाह है कि अल्मोड़ा में ठहरें। शहर 4 किमी लंबी पहाड़ी पर बसा है, जहाँ नंदा देवी मंदिर, माल रोड बाज़ार, ब्राइट एंड कॉर्नर का सूर्यास्त पॉइंट और GIC वाली पहाड़ी का सुबह का व्यूपॉइंट हैं। घंटियों से भरा चितई गोलू मंदिर 7 किमी और कसार देवी की पहाड़ी 8 किमी दूर है। इनमें से कुछ भी हल्द्वानी से एक दिन में आकर नहीं देखा जा सकता। हमारी अल्मोड़ा में क्या देखें वाली गाइड इनमें से हर जगह के बारे में बताती है, साथ में जागेश्वर, कटारमल और बिनसर, और यह भी कि दो या तीन दिनों में इन्हें कैसे जोड़ें।
अल्मोड़ा में कहाँ ठहरें। यहाँ होटल तीन भरोसेमंद दायरों में आते हैं। Rs 1,400 से 2,400 के कम बजट में हॉलिडे होम का कुमाऊँ मंडल विकास निगम (KMVN) टूरिस्ट रेस्ट हाउस और माल रोड की Hotel Shikhar जैसी छोटी सरायें हैं। Rs 3,200 से 5,500 के मध्यम बजट में Imperial Heights, Bansal Hotel और कसार देवी की ओर Ananda Tree House हैं। Rs 6,500 से 12,000 के ऊँचे बजट में Kasar Rainforest Retreat और Imperial Heights के पहाड़ की ओर खुलने वाले सुइट हैं। सबसे व्यस्त हफ़्तों, यानी अप्रैल से जून और अक्टूबर में, 3 हफ़्ते पहले बुक करें।
आते या जाते समय हल्द्वानी में एक रात। अगर आपकी ट्रेन देर रात काठगोदाम पहुँचती है या लौटने की फ़्लाइट अगली सुबह जल्दी पंतनगर से है, तो आते या जाते समय हल्द्वानी में एक रात रुकना समझदारी है। ऐसी एक रात के सही किराए के लिए हमारी हल्द्वानी के बजट होटल वाली सूची देखें। अगर परिवार के साथ अल्मोड़ा के अलावा कॉर्बेट या भीमताल भी जाना है, तो हमारा पर्यटकों के लिए हल्द्वानी के होटल वाला पेज पूरे शहर के होटल इलाकेवार बताता है।
एक योजना जो अमल में अच्छी चलती है: रानीखेत एक्सप्रेस से सुबह 5 बजे काठगोदाम पहुँचें, 7:30 बजे तक हल्द्वानी के होटल में नाश्ता करें और 9 बजे तक अल्मोड़ा के लिए निकल जाएँ। अल्मोड़ा में दो रातें बिताएँ, फिर लौटने वाले दिन सुबह कैंची धाम पर रुकते हुए हल्द्वानी आएँ और 3:35 बजे तक काठगोदाम से शाम की शताब्दी पकड़ें। तड़के पहुँचने और लौटने का इंतज़ाम हल्द्वानी का होटल सँभालता है, और असली छुट्टी अल्मोड़ा में बीतती है।
अप्रैल से जून। यह अल्मोड़ा का मुख्य सीज़न है। दिन में तापमान 20 से 28 डिग्री C और रात में 12 से 17 डिग्री C रहता है। सुबहें साफ़ रहती हैं और दोपहर में कभी-कभी बादल आते हैं। ब्राइट एंड कॉर्नर से त्रिशूल, नंदा देवी और पंचाचूली की चोटियाँ देखने का यही सबसे अच्छा मौसम है। इन दिनों होटल 25 से 30 प्रतिशत महँगे होते हैं, इसलिए जल्दी बुक करें।
जुलाई से मध्य सितंबर। यह बरसात का मौसम है। रोज़ बारिश होती है, खैरना से अल्मोड़ा तक के मोड़ फिसलन भरे हो जाते हैं, और दोपहर 3 बजे तक धुंध छाकर चोटियों को ढक लेती है। सफ़र में 3 घंटे 45 मिनट तक लग सकते हैं। अगर आपको हरी-भरी धुंधली पहाड़ियाँ ही चाहिए और हिमालय के नज़ारे ज़रूरी नहीं, तभी इस मौसम में जाएँ। गरमपानी में कोसी पूरे उफान और शोर के साथ बहती है, जिसका अपना आनंद है।
मध्य सितंबर से नवंबर की शुरुआत। बरसात के बाद साल की सबसे साफ़ हवा रहती है, पहाड़ सबसे साफ़ दिखते हैं और दिन में तापमान 18 से 25 डिग्री C रहता है। यह दूसरा सबसे अच्छा मौसम है और कम भीड़ चाहने वालों के लिए सही समय है। होटल सामान्य से करीब 15 प्रतिशत महँगे रहते हैं।
दिसंबर से फरवरी। सर्दियों में दिन का तापमान 10 से 16 डिग्री C और रात का 1 से 6 डिग्री C रहता है, और कसार देवी की पहाड़ी पर कभी-कभी पारा शून्य से नीचे चला जाता है। सड़क खुली रहती है, लेकिन दिसंबर के आख़िर और जनवरी में खैरना से अल्मोड़ा की चढ़ाई पर हल्की बर्फ़ गिरने पर रास्ता हर बार 1 से 2 दिन बंद हो सकता है। होटल अपने सामान्य किराए पर रहते हैं, कुछ ज़्यादा नहीं लेते। ठंड में पहाड़ घूमना हो और गर्म कपड़े पूरे हों, तो यह अच्छा समय है।
इस रास्ते पर हर मौसम कैसा रहता है, यह विस्तार से जानने के लिए हमारी गाइड हल्द्वानी घूमने का सबसे अच्छा समय देखें।
रानीखेत, कौसानी, बिनसर और जागेश्वर, चारों जगह 23 जनवरी 2026 को बर्फ़ गिरी थी। हमारी उत्तराखंड में सर्दियाँ गाइड में पिछली तीन सर्दियों की बर्फ़बारी की तारीख़ें दर्ज हैं, और यह भी कि उनका सफ़र पर क्या असर पड़ा। इनमें से किस जगह असल में कितनी बार बर्फ़ गिरती है, और पहाड़ की चोटियों पर शहरों से ज़्यादा बर्फ़ क्यों मिलती है, यह उत्तराखंड में बर्फ़ कहाँ देखें में बताया गया है।
उल्टी और चक्कर। खैरना से अल्मोड़ा की 27 किमी की चढ़ाई में 60 से 70 तीखे मोड़ हैं। अगर गाड़ी में आपका जी मिचलाता है, तो खैरना से निकलने के 45 मिनट पहले दवा ले लें और आगे की सीट पर बैठें। नाश्ता हल्का रखें; मोड़ों पर आलू पराठे की बजाय चाय और केला ज़्यादा ठीक रहते हैं।
पेट्रोल-डीज़ल। टंकी हल्द्वानी में ही भरवा लें। इसके बाद भरोसेमंद पेट्रोल पंप भवाली (33 किमी), खैरना (60 किमी) और फिर अल्मोड़ा में हैं। चढ़ाई के कारण भवाली से अल्मोड़ा के बीच सेडान 9 से 11 किमी प्रति लीटर ही चलती है।
मोबाइल सिग्नल। Jio ज़्यादातर रास्ते पर चलता है। Airtel गरमपानी और खैरना के बीच 1 से 2 किमी के दो छोटे हिस्सों में चला जाता है, और खैरना से अल्मोड़ा की चढ़ाई पर दोनों नेटवर्क अच्छे रहते हैं। फिर भी हल्द्वानी से निकलने से पहले ऑफ़लाइन नक्शे डाउनलोड कर लें, क्योंकि घने जंगल में सिग्नल कमज़ोर हो सकता है।
ATM। नकद पैसे हल्द्वानी से ही लेकर चलें। भवाली में SBI और PNB के दो ATM हैं जो ज़्यादातर दिन चलते हैं। खैरना में SBI का एक ही ATM है, जिसमें वीकेंड पर पैसे ख़त्म हो जाते हैं। अल्मोड़ा बाज़ार में 7-8 चालू ATM हैं; माल रोड वाले सिरे के ATM सबसे भरोसेमंद हैं, जबकि KMVN वाले सिरे के ATM रविवार को खाली हो जाते हैं। ढाबे के खाने, पार्किंग और छोटे मंदिरों में नकद ही चलता है।
ड्राइवर के रात में ठहरने का इंतज़ाम। अगर एक ही ड्राइवर के साथ अल्मोड़ा में 2 रातें रुकना है, तो निकलने से पहले उसके ठहरने की बात तय कर लें। अल्मोड़ा के ज़्यादातर बजट होटल ड्राइवर के लिए सादा कमरा देते हैं, और KMVN में Rs 250 में डॉरमेट्री का बिस्तर मिल जाता है। ड्राइवर की हर रात के लिए Rs 400 से 600 अलग से जोड़कर चलें।
हमारी बाकी हल्द्वानी गाइड रास्ते के पड़ावों, कैब किराए पर लेने और सफ़र के दोनों सिरों पर ठहरने की जगहों के बारे में विस्तार से बताती हैं।
अल्मोड़ा हल्द्वानी से सड़क के रास्ते 87 किमी दूर है, NH109 पर भवाली, गरमपानी और खैरना होते हुए। सीधी रेखा में दूरी 53 किमी है। किसी शांत कामकाजी दिन की सुबह 2 घंटे 50 मिनट लगते हैं, जबकि वीकेंड की दोपहर में भवाली बाज़ार के जाम से यह समय 3 घंटे 15 मिनट हो जाता है। रास्ता हल्द्वानी के 424 मीटर से अल्मोड़ा के 1,651 मीटर तक चढ़ता है, यानी 1,227 मीटर की चढ़ाई।
2026 में एक तरफ़ का कैब किराया सेडान में Rs 3,200 से 3,800 और Innova में Rs 4,200 से 4,800 है। उसी दिन लौटने और अल्मोड़ा में 4 घंटे रुकने पर सेडान का किराया Rs 5,200 से 6,800 और Innova का Rs 6,800 से 7,800 है। काठगोदाम की प्रीपेड कैब लोकल यूनियन रेट से Rs 400 से 600 ज़्यादा लेती हैं, और बुकिंग ऐप लोकल रेट से 15 से 25 प्रतिशत ज़्यादा।
किसी शांत कामकाजी दिन की सुबह 2 घंटे 50 मिनट लगते हैं, और वीकेंड की दोपहर में 3 घंटे 15 मिनट तक। हल्द्वानी से भवाली 33 किमी है और 50 मिनट लगते हैं। भवाली से गरमपानी होते हुए कोसी नदी के किनारे खैरना 27 किमी है और 45 मिनट लगते हैं। खैरना से अल्मोड़ा 27 किमी की घुमावदार पहाड़ी सड़क है, जिसमें 55 मिनट लगते हैं और यही सबसे धीमा हिस्सा है।
अल्मोड़ा में ठहरें। इस शहर को आराम से देखने के लिए 2 से 3 रातें चाहिए। नंदा देवी मंदिर, ब्राइट एंड कॉर्नर का सूर्यास्त, कसार देवी की पहाड़ी की सैर, चितई गोलू मंदिर और सुबह हिमालय के दर्शन के लिए कम से कम दो पूरे दिन लगते हैं। हल्द्वानी में सिर्फ़ ट्रेन से आते या जाते समय रुकें। उस एक रात के लिए हमारी हल्द्वानी के बजट होटल वाली सूची देखें।
सबसे अच्छा रास्ता NH109 वाला मुख्य रास्ता ही है, जो काठगोदाम, भीमताल मोड़, भवाली, गरमपानी और खैरना से होकर जाता है। यह 87 किमी है और किसी शांत कामकाजी दिन की सुबह 2 घंटे 50 मिनट लगते हैं। हर कैब ड्राइवर, रोडवेज़ बस और स्थानीय लोग इसी रास्ते से जाते हैं। 22 किमी पर जंक्शन से भीमताल-सातताल वाला दूसरा रास्ता 14 किमी और 40 मिनट ज़्यादा लेता है, लेकिन भवाली बाज़ार से बचा देता है, जो शनिवार-रविवार की दोपहर में काम आता है।
हाँ। उत्तराखंड रोडवेज़ तिकोनिया के हल्द्वानी रोडवेज़ बस अड्डे से अल्मोड़ा के लिए रोज़ पाँच से सात बसें चलाता है, जिनमें पहली सुबह 05:30 बजे जाती है। किराया Rs 220 से 280 है और भवाली व खैरना में रुकते हुए 4 से 5 घंटे लगते हैं। सीज़न में शुक्रवार और शनिवार को पहली तीन बसें भर जाती हैं, इसलिए एक शाम पहले तिकोनिया काउंटर पर टिकट ले लें। काठगोदाम स्टैंड से शेयर्ड सूमो Rs 220 प्रति सीट लेती हैं और सवारियाँ पूरी होते ही चल देती हैं।