धार पर बसा पुराना शहर, और उससे एक-दो घंटे के भीतर के मंदिर, अभयारण्य और शैल चित्र, अल्मोड़ा बस अड्डे से सड़क की दूरी और दो-तीन दिन की योजना के साथ।
छोटा जवाब: अल्मोड़ा करीब 1,650 मीटर की ऊँचाई पर एक धार पर बसा पुराना पहाड़ी शहर है, हल्द्वानी से सड़क के रास्ते 88 किमी ऊपर, और लोग जो देखने आते हैं उसमें से ज़्यादातर या तो शहर में है या उससे एक घंटे के भीतर। शहर में चंद राजाओं का नंदा देवी मंदिर, माल रोड के साथ चलता लंबा बाज़ार और सूर्यास्त के लिए ब्राइट एंड कॉर्नर है। पास में कसार देवी (7.5 किमी) और चितई गोलू देवता मंदिर (6.8 किमी) हैं, दोनों आराम से एक सुबह में। थोड़ा आगे कटारमल सूर्य मंदिर (17 किमी), लखुडियार के शैल चित्र (14 किमी), जागेश्वर धाम (34 किमी) और बिनसर अभयारण्य (ज़ीरो पॉइंट के पास के रेस्ट हाउस तक 45 किमी) हैं। दो पूरे दिनों में शहर, कसार देवी, चितई और कटारमल हो जाते हैं; तीसरे दिन जागेश्वर या बिनसर में एक रात जुड़ जाती है। यहाँ दी गई हर दूरी अल्मोड़ा रोडवेज़ बस अड्डे से Google Maps की सड़क की दूरी है, जो 29 अक्टूबर 2026 को देखी गई।
अल्मोड़ा एक धार पर बसा है, जिसके एक ओर कोसी की घाटी है और दूसरी ओर सुयाल की, और यह शहर आज भी उस राजधानी जैसा लगता है जो यह कभी था। 16वीं सदी में चंद राजा अपनी राजधानी चंपावत से यहाँ ले आए, उनके बाद करीब 25 साल यह गोरखाओं के पास रहा, और 1815 में अंग्रेज़ों ने इसे ले लिया। इसी का नतीजा है धार की रीढ़ पर पुराना बाज़ार, राजाओं के बनवाए मंदिर, एक छावनी, और ढलानों पर अंग्रेज़ों के ज़माने के मकान। यह अल्मोड़ा ज़िले का मुख्यालय भी है, इसलिए रोडवेज़ बस अड्डा, अस्पताल और सरकारी दफ़्तर सब यहीं हैं।
शहर करीब 1,650 मीटर की ऊँचाई पर है। यह नैनीताल से नीचे है, इसलिए सर्दी में कम ठंडा और मई में ज़्यादा गरम रहता है, पर साफ़ सुबह धार से बर्फ़ीली चोटियों का जो नज़ारा दिखता है वह नैनीताल से कहीं ज़्यादा चौड़ा है। ज़्यादातर लोग हल्द्वानी या काठगोदाम से ऊपर आते हैं, और अक्सर रास्ते में कैंची धाम रुकते हैं, जो इसी सड़क पर अल्मोड़ा से 45 किमी पहले पड़ता है।
नीचे की हर योजना एक बात से तय होती है। अल्मोड़ा की जगहें अलग-अलग दिशाओं में हैं: पूर्व में चितई और जागेश्वर, उत्तर-पूर्व में कसार देवी और बिनसर, पश्चिम में कटारमल। इसलिए दिन तब बेहतर बीतता है जब आप जगहों को उनकी मशहूरी से नहीं, सड़क के हिसाब से जोड़ें।
| जगह | सड़क की दूरी | Google Maps पर समय | किस ओर |
|---|---|---|---|
| ब्राइट एंड कॉर्नर | 2.2 किमी | 6 मिनट | माल रोड का पश्चिमी छोर |
| चितई गोलू देवता मंदिर | 6.8 किमी | 18 मिनट | पूर्व, जागेश्वर और पिथौरागढ़ वाली सड़क पर |
| कसार देवी मंदिर | 7.5 किमी | 21 मिनट | उत्तर-पूर्व, बिनसर वाली सड़क पर |
| लखुडियार के शैल चित्र | 13.9 किमी | 33 मिनट | पूर्व, सुयाल के किनारे |
| कटारमल सूर्य मंदिर | 16.9 किमी | 40 मिनट | पश्चिम, कोसी के पार |
| जागेश्वर धाम | 34.0 किमी | 1 घंटा 17 मिनट | पूर्व, चितई से आगे |
| कैंची धाम | 44.9 किमी | 1 घंटा 32 मिनट | दक्षिण-पश्चिम, भवाली की ओर वापस |
| बिनसर, ज़ीरो पॉइंट के पास KMVN रेस्ट हाउस | 45.3 किमी | करीब 2 घंटे | उत्तर-पूर्व, कसार देवी से आगे |
स्रोत: Google Maps, कार से, माल रोड पर उत्तराखंड रोडवेज़ बस अड्डे से, 28 अक्टूबर की देर रात और 29 अक्टूबर 2026 की सुबह-सुबह, जब ट्रैफ़िक नहीं था। दिन में और बाज़ार की भीड़ में ज़्यादा समय लगेगा। अल्मोड़ा ज़िले की वेबसाइट चितई को अल्मोड़ा से करीब 8 किमी और कटारमल को करीब 17 किमी बताती है।
शुरुआत धार के बीच से कीजिए। नंदा देवी मंदिर चंद राजाओं ने बनवाया था, और ज़िले के विवरण के अनुसार देवी की मूर्ति एक शिव मंदिर के अग्र कक्ष में है। हर साल सितंबर के आसपास शहर नंदा देवी मेले के लिए भर जाता है, पाँच दिन का यह मेला ज़िले के अनुसार यहाँ 400 से ज़्यादा साल से लग रहा है। अगर आपकी तारीख़ें उसी हफ़्ते में हैं, तो कमरा पहले से बुक कीजिए और बाज़ार में भारी भीड़ की उम्मीद रखिए।
पुराना बाज़ार माल रोड के ऊपर धार की चोटी पर चलता है, दुकानों, मंदिरों और लकड़ी के पुराने अग्रभाग वाले मकानों की एक संकरी गली। अल्मोड़ा की मिठाइयाँ यहीं से आती हैं: बाल मिठाई, सफ़ेद चीनी के दानों में लिपटी भूरी मिठाई, और सिंगौड़ी, पत्ते में लिपटी खोये की मिठाई। ज़्यादातर लोग इनमें से किसी एक का डिब्बा घर ले जाते हैं।
माल रोड पर 2.2 किमी आगे, धार के पश्चिमी छोर पर ब्राइट एंड कॉर्नर है, जहाँ अल्मोड़ा कोसी घाटी पर सूरज डूबते देखने जाता है, और साफ़ सुबहों में चोटियाँ देखने। इसके पास ही रामकृष्ण कुटीर है। बस अड्डे से यह थोड़ी पैदल दूरी पर है या छह मिनट की ड्राइव पर, इसलिए ऊपर पहुँचने के बाद पहली शाम के लिए यह सबसे आसान जगह है।
बस अड्डे से 7.5 किमी, करीब 20 मिनट, बिनसर वाली सड़क पर।
कसार देवी शहर के उत्तर-पूर्व में एक चट्टानी धार पर बना छोटा मंदिर है, और जब लोग कहते हैं कि उन्हें अल्मोड़ा देखना है तो ज़्यादातर उनका मतलब यही जगह होती है। ज़िला मंदिर के ढाँचे को दूसरी सदी ईसवी का बताता है। स्वामी विवेकानंद 1890 के दशक में यहाँ आए, और 20वीं सदी में यह धार पश्चिम के कई साधकों और लेखकों को खींच लाई, जिनमें डेनमार्क में जन्मे अल्फ़्रेड सोरेनसन, जिन्हें सुन्यता कहा गया, और बौद्ध विद्वान लामा अनागारिक गोविंद शामिल थे। गाँव के ठीक आगे का हिस्सा क्रैंक्स रिज के नाम से जाना गया, और 1960 और 1970 के दशकों में यह हिप्पी यात्रियों का पड़ाव रहा। आज इस धार पर गेस्ट हाउस और कैफ़े हैं, और अल्मोड़ा के पास कुछ शांत रातें बिताने के लिए यह सबसे अच्छी जगहों में से है।
इंटरनेट पर आप पढ़ेंगे कि नासा ने पाया है कि कसार देवी वैन एलन बेल्ट पर या किसी ख़ास चुंबकीय क्षेत्र पर है। हमें नासा का ऐसा कोई बयान नहीं मिला। वैन एलन बेल्ट आवेशित कणों की परतें हैं जो पूरी पृथ्वी को करीब 1,000 किमी और उससे ज़्यादा ऊँचाई पर घेरे हुए हैं, इसलिए कोई एक पहाड़ी उन पर नहीं बसी होती। लोग कसार देवी शांति और नज़ारे के लिए आते हैं, और ये दोनों सचमुच मिलते हैं।
बस अड्डे से 6.8 किमी, करीब 20 मिनट, पूर्व में जागेश्वर और पिथौरागढ़ वाली सड़क पर।
गोलू देवता कुमाऊँ में न्याय के देवता हैं, और चितई उनका सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। ज़िला उन्हें गौर भैरव के रूप में शिव का अवतार बताता है। सबसे पहले घंटियाँ नज़र आती हैं: हर आकार की हज़ारों घंटियाँ, जो उन लोगों ने रास्तों और छतों पर टाँगी हैं जिनकी मन्नत पूरी हुई। बहुत से लोग लिखी हुई अर्ज़ियाँ भी छोड़ जाते हैं, कुछ स्टांप पेपर पर, जिनमें देवता से किसी विवाद का फ़ैसला करने की गुहार होती है। यहाँ एक घंटे से कम लगता है, और क्योंकि यह जागेश्वर वाली सड़क पर है, जागेश्वर वाले दिन की शुरुआत या अंत में आसानी से जुड़ जाता है।
गोलू देवता का एक और प्रसिद्ध मंदिर भवाली के ठीक ऊपर घोड़ाखाल में है, जिसके बारे में हमने कैंची धाम के पास घूमने की जगहों वाली गाइड में लिखा है।
बस अड्डे से 16.9 किमी, करीब 40 मिनट, पश्चिम में कोसी के पार।
कटारमल कुमाऊँ का अकेला सूर्य मंदिर है, एक बड़े मुख्य मंदिर के चारों ओर पत्थर के छोटे देवालयों का समूह, जो पूर्व की ओर कोसी घाटी को देखता है। इसे आमतौर पर 9वीं सदी का और कत्यूरी राजाओं का बनवाया माना जाता है। पुरानी मूर्ति चोरी होने के बाद मंदिर के नक़्क़ाशीदार लकड़ी के दरवाज़े और पैनल सुरक्षा के लिए नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय ले जाए गए, और वे आज भी वहीं हैं। ज़िले का पेज कोसी की ओर से करीब 3 किमी पैदल चढ़ाई बताता है; Google Maps अब गाड़ियों को मंदिर के पास तक ले जाता है, इसलिए निकलने से पहले अल्मोड़ा में पूछ लीजिए कि सड़क कहाँ तक जाती है, और ऐसे जूते पहनिए जिनमें सीढ़ियाँ चढ़ सकें।
बस अड्डे से 34 किमी, करीब सवा घंटा, पूर्व में चितई से आगे।
जागेश्वर जटा गंगा नाले के किनारे ऊँचे देवदारों के नीचे पत्थर के मंदिरों की एक घाटी है। ज़िला यहाँ छोटे-बड़े 124 मंदिर गिनता है, सब शिव को समर्पित, और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इस समूह की देखरेख करता है और उसके पास एक छोटा संग्रहालय चलाता है। कुमाऊँ के इस हिस्से का यह सबसे बड़ा तीर्थ है, और सावन के महीने में, जुलाई और अगस्त में, यहाँ बहुत भीड़ रहती है।
जागेश्वर अल्मोड़ा से एक दिन में हो जाता है, रास्ते में चितई के साथ, या अगर आप मंदिर खुलते ही वहाँ होना चाहते हैं तो उसके लिए एक अलग रात रखिए। बहुत से श्रद्धालु इसे कैंची धाम के साथ जोड़ते हैं; कैंची से अल्मोड़ा होकर यह करीब 80 किमी है, इसलिए इस जोड़ी के लिए अल्मोड़ा या जागेश्वर में एक रात चाहिए। उस यात्रा का पहला हिस्सा हमारी हल्द्वानी से कैंची धाम वाली गाइड में है।
ज़ीरो पॉइंट के पास KMVN रेस्ट हाउस तक 45 किमी, करीब 2 घंटे, उत्तर-पूर्व में कसार देवी से आगे।
बिनसर कभी चंद राजाओं की ग्रीष्मकालीन राजधानी था और 1988 से वन्यजीव अभयारण्य है। यह एक ऊँची धार पर बांज और बुरांश का जंगल है, और इसकी पहचान ज़ीरो पॉइंट से है, चोटी पर बना एक व्यू पॉइंट जहाँ से साफ़ दिन में बर्फ़ीली चोटियों की लंबी शृंखला दिखती है। यहाँ प्रवेश शुल्क वाला एक गेट है, रेस्ट हाउस वाले इलाक़े से ज़ीरो पॉइंट तक करीब 2 किमी पैदल रास्ता है, और अंदर ठहरने की गिनी-चुनी जगहें हैं, जिनमें KMVN का रेस्ट हाउस भी है। गेट के मौजूदा शुल्क की कोई सरकारी सूची हमें नहीं मिली, इसलिए नक़द साथ रखिए।
बिनसर एक दिन की यात्रा से बेहतर एक रात के लिए है: अल्मोड़ा से ड्राइव करीब दो घंटे की है, और ज़ीरो पॉइंट पर सबसे अच्छी रोशनी सुबह-सुबह होती है। 23 जनवरी 2026 को बिनसर में बर्फ़ गिरी थी, और जागेश्वर में भी; हाल की सर्दियों का पूरा ब्योरा हमारे उत्तराखंड में बर्फ़ कहाँ देखें वाले पेज पर है। ध्यान रहे कि रानीखेत के पास का बिनसर महादेव मंदिर एक अलग जगह है, अल्मोड़ा से करीब एक घंटा पश्चिम में।
बस अड्डे से 13.9 किमी, करीब 35 मिनट, पूर्व में सुयाल के किनारे।
लखुडियार सुयाल नदी के ऊपर एक चट्टानी आश्रय है, जिसमें काले, लाल और सफ़ेद रंग के प्रागैतिहासिक चित्र हैं: इंसानी आकृतियों की कतारें, जानवर और लहरदार रेखाएँ। यह छोटा है और आसानी से छूट जाता है, और यही इसकी ख़ासियत है। आधा घंटा रखिए, और दिन के उजाले में जाइए, क्योंकि आश्रय सड़क से थोड़ी चढ़ाई पर है।
अल्मोड़ा के लिए दो या तीन रातें रखिए। जगहों को सड़क के हिसाब से जोड़िए:
हल्द्वानी से एक दिन में आना-जाना मुमकिन है पर थका देने वाला है: हर तरफ़ करीब तीन घंटे लगते हैं, जिसके बाद सिर्फ़ शहर और चितई या कसार देवी में से एक के लिए समय बचता है। अगर आपके पास एक ही दिन है, तो बेहतर योजना है सुबह कैंची धाम, दोपहर तक अल्मोड़ा, और रात यहीं।
बर्फ़ीली चोटियाँ सबसे साफ़ अक्टूबर और नवंबर में दिखती हैं, और फिर सर्दियों की बारिश के बाद के खुले दिनों में। मार्च और अप्रैल में बिनसर और धारों पर बुरांश खिलता है। मई और जून में दिन गरम और धुंधले होते हैं, और यही शहर का सबसे व्यस्त समय है। जुलाई से सितंबर तक मानसून पहाड़ी सड़कों पर भूस्खलन लाता है, खैरना से ऊपर की चढ़ाई पर भी; निकलने से पहले सड़क का हाल देख लीजिए, जैसे हमारे कुमाऊँ लैंडस्लाइड डिटेक्टर पर। सर्दी ठंडी पर आमतौर पर साफ़ रहती है, और कुछ सालों में बर्फ़ शहर में नहीं बल्कि बिनसर, कसार देवी और जागेश्वर के आसपास की ऊँची धारों पर गिरती है; ठंडे महीनों के लिए हमारी सर्दियों में उत्तराखंड गाइड देखिए।
सबसे पास का रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, और वहाँ से ड्राइव करीब तीन घंटे की है। 29 अक्टूबर को Google Maps ने हल्द्वानी रोडवेज़ बस अड्डे से भीमताल वाली सड़क से 88.1 किमी और 2 घंटे 52 मिनट, और भवाली होकर NH 109 से 93 किमी और करीब 3 घंटे बताए। इस साल पहले लिखी गई हमारी हल्द्वानी से अल्मोड़ा गाइड भवाली वाली सड़क के लिए 87 किमी बताती है; दोनों रास्ते भवाली के आगे मिल जाते हैं और खैरना से धार तक चढ़ते हैं। काठगोदाम से भीमताल वाली सड़क से यह आँकड़ा 82.5 किमी था। कैंची धाम रास्ते में पड़ता है, अल्मोड़ा से 44.9 किमी पहले।
टैक्सी किराया, हिस्से-हिस्से में पूरा रास्ता और रुकने लायक जगहें हल्द्वानी से अल्मोड़ा वाली गाइड में हैं।
कहाँ सोएँ, यह इस पर निर्भर है कि आप किसलिए आए हैं:
हाँ, अगर आप इसे दो या तीन रातें दें। पुराना शहर और बाज़ार, नंदा देवी मंदिर और ब्राइट एंड कॉर्नर का सूर्यास्त एक शाम भर देते हैं, और एक घंटे के भीतर कसार देवी, चितई गोलू देवता मंदिर, कटारमल सूर्य मंदिर और जागेश्वर धाम हैं। हल्द्वानी से जल्दबाज़ी में एक दिन की यात्रा निराश करती है, क्योंकि दिन का ज़्यादातर हिस्सा सड़क पर जाता है।
दो पूरे दिनों में शहर, कसार देवी, चितई और कटारमल हो जाते हैं। तीसरे दिन 34 किमी पूर्व में जागेश्वर धाम जुड़ता है, या ज़ीरो पॉइंट से भोर का नज़ारा देखने के लिए बिनसर अभयारण्य में एक रात।
अगर आप बस से आ रहे हैं और बाज़ार और हर दिशा की यात्राएँ चाहते हैं तो अल्मोड़ा शहर में ठहरिए। शांति, नज़ारे और धीमे ठहराव के लिए 7.5 किमी और करीब 20 मिनट दूर कसार देवी की धार पर ठहरिए। बहुत से लोग अपनी रातें दोनों में बाँट लेते हैं।
करीब 1,650 मीटर की ऊँचाई वाले शहर में अक्सर नहीं। बिनसर, कसार देवी और जागेश्वर के आसपास की ऊँची धारों पर कुछ सर्दियों में बर्फ़ गिरती है; 23 जनवरी 2026 को बिनसर और जागेश्वर में बर्फ़ गिरी थी।
सड़क से करीब 88 किमी। 29 अक्टूबर 2026 को Google Maps ने हल्द्वानी रोडवेज़ बस अड्डे से भीमताल वाली सड़क से 88.1 किमी और 2 घंटे 52 मिनट, और भवाली होकर NH 109 से 93 किमी बताए। दिन में तीन घंटे या उससे ज़्यादा रखिए।