कैंची धाम गाइड · 26 अगस्त 2026

कैंची धाम के नियम: ड्रेस कोड, फोटोग्राफी और मंदिर की मर्यादा

कैंची धाम में नियम असल में दो हैं। बाक़ी जो इंटरनेट पर लिखा मिलता है, वह किसी ने पन्ना भरने के लिए गढ़ा है।

छोटा जवाब: कैंची धाम में लिखित नियम दो ही हैं। पहला कपड़ों को लेकर, जो अगस्त 2023 में मंदिर की ओर से लगाई गई एक सूचना से आया और जिसमें अमर्यादित कपड़ों में परिसर में आने से मना किया गया है। दूसरा, परिसर के भीतर फोटो और वीडियो पर रोक, जो उससे भी पुरानी है और हर जून के मेले में दोहराई जाती है, अब रील बनाने के साथ। इनके अलावा जो लंबी सूचियाँ घूमती हैं, कौन सी जींस चलेगी, फ़ोन गेट पर जमा होगा या नहीं, लॉकर कहाँ है, उनका कोई स्रोत नहीं मिलता। न प्रवेश शुल्क है, न टिकट, न ड्रेस कोड पर जुर्माना।

कैंची धाम का प्रवेश द्वार और मंदिर के नारंगी शिखर, दाईं ओर गेट पर कतार में खड़े श्रद्धालु
दाईं ओर वही गेट है जहाँ कतार लगती है। वहाँ पहुँचते-पहुँचते कैमरा बंद हो जाना चाहिए। फोटो: गूगल मैप्स योगदानकर्ता।

ड्रेस कोड, जो 2023 से लागू है।

अगस्त 2023 के पहले हफ़्ते में मंदिर की ओर से कैंची धाम के बाहर एक सूचना लगाई गई। फ़ैसला ट्रस्ट की बैठक में हुआ था, और उस वक़्त अमर उजाला, ज़ी न्यूज़ और ऑर्गनाइज़र समेत कई जगह यह ख़बर छपी। सूचना पूरी पढ़ लेना ठीक रहेगा, क्योंकि वह छोटी है और लगभग कोई इसे उद्धृत नहीं करता:

श्री कैंची धाम के दर्शन को आने वाले सभी श्रद्धालुओं से निवेदन है कि मंदिर की पवित्रता बनाए रखते हुए अमर्यादित एवं अशोभनीय वस्त्र पहनकर मंदिर परिसर में प्रवेश न करें।

नियम बस इतना है। इसमें न किसी कपड़े का नाम है, न कोई नाप, न कोई सज़ा। यह एक निवेदन है, जिसके पीछे बस यह व्यावहारिक बात है कि गेट पर खड़े लोग आपको अंदर जाने से रोक सकते हैं।

आपके लिए इसका मतलब उतना उलझा हुआ नहीं है जितना इंटरनेट पर लगता है। कंधे और घुटने ढके हों, और ऐसा कुछ न हो जो आप किसी रिश्तेदार के घर किसी बड़े मौक़े पर पहनकर न जाएँ, तो कोई आपको नहीं रोकेगा। कुर्ता-पायजामा, सलवार कमीज़, साड़ी, पैंट के साथ शर्ट, इनमें से किसी पर कोई नज़र नहीं उठेगी। सूचना का निशाना शॉर्ट्स, छोटी ड्रेस और स्लीवलेस टॉप हैं। वैसे भी कैंची ठंडी घाटी में है, एक परत ऊपर से डालने का मन वहाँ अपने आप हो जाता है।

कैंची ने इसमें कुछ नया नहीं किया था। नैनीताल के नैना देवी मंदिर में ऐसा ही बोर्ड पहले लग चुका था, और 2023 में यही व्यवस्था उत्तराखंड के महानिर्वाणी पंचायती अखाड़े के मंदिरों तक, हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव और ऋषिकेश के नीलकंठ महादेव तक फैली।

वह सूची जो कैंची धाम की है ही नहीं।

कैंची धाम का ड्रेस कोड खोजिए और एक के बाद एक पेज पर वही साफ़-सुथरी सूची मिलेगी: फटी जींस मना, टाइट जींस मना, नाइट सूट मना, हाफ पैंट मना, वेस्टर्न ड्रेस मना, लोअर मना। पढ़ने में यह मंदिर का नियम लगता है। है नहीं, कम से कम कैंची का तो नहीं।

यह सूची 2023 की एक ऐसी ख़बर से आई है जिसमें देश भर के मंदिरों के ड्रेस कोड गिनाए गए थे, और जो कैंची वाली ख़बर के साथ छपी थी, उसके भीतर नहीं। सूची बताती है कि देश के कई मंदिरों ने मिलाकर क्या-क्या मना किया है। कहीं रास्ते में वह अपने संदर्भ से कट गई, कैंची धाम के नाम से जुड़ गई, और नक़ल दर नक़ल आधिकारिक दिखने लगी।

यह बात हम बाल की खाल निकालने के लिए नहीं लिख रहे। अगर आप यह मानकर यात्रा की तैयारी करेंगे कि जींस पहनकर गए तो गेट से लौटा दिए जाएँगे, तो सामान अलग बाँधेंगे और एक ऐसे दिन बेवजह चिंता करेंगे जिसमें पहले ही बहुत भागदौड़ है। साफ़, सादे और शालीन कपड़े, बस इतना पैमाना है। ट्रस्ट ने इससे ज़्यादा कुछ नहीं कहा, और जो नहीं कहा उसे हम अंदाज़े से नहीं भरेंगे।

फोटो और वीडियो पर रोक।

यही वह नियम है जो सबसे ज़्यादा टूटता है, और अक्सर बिना इरादे के। दोनों में पुराना भी यही है। 2023 में जब ड्रेस कोड वाली सूचना लगी, तब की ख़बरों में लिखा था कि मंदिर प्रशासन पहले ही फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर रोक लगा चुका है। यानी कैमरे वाली पाबंदी हाल की सख़्ती नहीं है, बरसों से चली आ रही है।

रोक मंदिर परिसर के भीतर फोटो और वीडियो, दोनों पर है। वहाँ मौजूद लोग इस पर अमल कराते हैं और टोकने में हिचकते नहीं। हर जून में जब स्थापना दिवस की भीड़ पहुँचती है, आश्रम प्रशासन मेले के लिए यह रोक दोहराता है और साफ़ कहता है कि रील बनाना भी इसमें शामिल है। किस आदत ने यह याद दिलाने पर मजबूर किया, यह उसी से समझ आ जाता है।

परिसर के बाहर कोई रोक नहीं है। घाटी, नीचे बहती शिप्रा, भवाली से आती घुमावदार सड़क, सड़क से दिखती इमारतें, यह सब आप जितना चाहें खींच सकते हैं। तस्वीरें रास्ते में ले लीजिए, और अंदर जाने से पहले फ़ोन जेब में रख दीजिए।

ड्रोन अलग मामला है और उस पर सख़्ती ज़्यादा है। वहाँ ड्रोन उड़ाने के लिए अनुमति चाहिए, और जून में स्थापना दिवस वाले दिनों में ज़िला प्रशासन इस पर पूरी तरह रोक लगाता रहा है।

मोबाइल, बैग और जूते: क्या लिखित है और क्या नहीं।

यहीं पर कैंची धाम की ज़्यादातर गाइड काम की नहीं रह जातीं, क्योंकि वे ऐसी व्यवस्थाएँ बताने लगती हैं जिनका कोई प्रकाशित स्रोत नहीं है। हम यह लकीर साफ़ खींच देना चाहते हैं।

मोबाइल। साथ ले जा सकते हैं। भीतर उससे कैमरा चलाना मना है। गेट पर फ़ोन जमा कराने का कोई नियम हमें कहीं नहीं मिला, न ही टोकन या काउंटर जैसी किसी व्यवस्था का ज़िक्र। कोई पेज यह लिख रहा हो कि आपका फ़ोन गेट पर रख लिया जाएगा, तो सवाल यह बनता है कि उसने यह कहाँ से लिया।

जूते। मंदिर क्षेत्र से पहले उतरेंगे, जैसे भारत के किसी भी मंदिर में। प्रवेश के पास ही रखने की अनौपचारिक जगह मिल जाती है। कोई तयशुदा क्लोकरूम, नंबर वाली रैक या शुल्क, ऐसा कुछ हमें दर्ज नहीं मिला।

बैग। बैग के आकार, जमा कराने या लॉकर को लेकर कोई प्रकाशित नियम नहीं मिला। सामान्य दिन यह सवाल ही नहीं उठता। भीड़ वाले वीकेंड पर कम सामान लेकर चलना आसान रहता है, पर यह सुविधा की बात है, क़ायदे की नहीं।

इनमें कुछ बदले, या आपको गेट पर ऐसी किसी बात पर रोका जाए जो यहाँ लिखी नहीं है, तो हमें बताइए। हर पेज के नीचे सुधार भेजने का फ़ॉर्म लगा है।

चढ़ावा, प्रसाद और खर्च।

खर्च का जवाब छोटा है: कुछ नहीं। कैंची धाम में प्रवेश शुल्क नहीं है, टिकट नहीं है, और ऐसी कोई लाइन नहीं है जो पैसे लेकर किसी को आगे कर दे। दान स्वैच्छिक है और परिसर के भीतर दान पात्र में ही दिया जाता है। कोई आपको कैंची धाम का प्रवेश टिकट या वीआईपी दर्शन पास बेच रहा हो, तो वह ऐसी चीज़ बेच रहा है जो है ही नहीं। इस पूरे धंधे पर हमने अलग से विस्तार में लिखा है

लोग साथ क्या ले जाते हैं, यह सीधा है: फूल, नारियल, प्रसाद, लाल चुनरी, कभी कंबल, जिसका इस परंपरा में अपना अर्थ है। रास्ते की दुकानों पर यह सब मिल जाता है, इसलिए मैदान से ढोकर ले जाने की ज़रूरत नहीं।

हफ़्ते में कई दिन दोपहर क़रीब 12:30 बजे निःशुल्क प्रसाद बँटता है, और मंगलवार शाम कीर्तन के बाद भी। इसे बोनस मानने के बजाय इसी के हिसाब से दिन बाँधना बेहतर रहता है। दिन भर का ब्योरा, और मंगलवार सबसे लंबा और सबसे भीड़ वाला दिन क्यों है, यह हमारे दर्शन समय वाले पेज पर है।

भीड़ वाले दिन क्या ध्यान रखें।

कैंची का आश्रम छोटा है। बग़ल से गुज़रती सड़क सँकरी है, प्रांगण बड़ा नहीं है, और सीज़न के किसी शनिवार को कई हज़ार लोग उस जगह से गुज़रते हैं जो इतने लोगों के लिए कभी बनी ही नहीं थी। दर्शन आराम से हो जाए, इसके लिए ज़्यादातर वही चाहिए जो किसी बोर्ड पर नहीं लिखा होता।

15 जून के आसपास नियम सख़्त हो जाते हैं।

15 जून मंदिर का स्थापना दिवस है, 1964 में हनुमान जी की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की तिथि, जो नीम करोली बाबा ने ख़ुद तय की थी। यह तारीख़ बदलती नहीं, हर साल यही रहती है, और इस दिन लाखों लोग उस घाटी में पहुँचते हैं जहाँ से एक ही सड़क निकलती है।

उन दिनों में बदलाव ज़्यादातर आने-जाने का होता है, पर होता बहुत है:

ये इंतज़ाम हर साल नैनीताल ज़िला प्रशासन नए सिरे से करता है और ब्योरे बदलते रहते हैं। तरीक़ा वही रहेगा, पर बारीकियाँ निकलने से एक पखवाड़ा पहले जाँच लीजिए। शांत दर्शन करने हैं तो साल का कोई और हफ़्ता चुनना बेहतर है।

यह पेज हम कैसे जाँचते हैं।

मंदिर के नियम वैसी चीज़ हैं जो एक बार लिख दी जाती हैं और फिर दस साल तक बिना दोबारा देखे दोहराई जाती रहती हैं। कपड़ों वाली मनगढ़ंत सूची इसी तरह फैली। इसीलिए इस पेज पर ऊपर जाँच की तारीख़ दिख रही है और अगली जाँच भी तय है।

हर बार हम नैनीताल ज़िला प्रशासन के पन्ने, मंदिर ट्रस्ट की अपनी साइट, और सूचना या जून वाली व्यवस्था में किसी बदलाव की ख़बर दोबारा देखते हैं। ट्रस्ट ने असल में क्या छापा है और उसके नाम पर क्या घूम रहा है, इन दोनों को हम अलग रखते हैं। जो चीज़ किसी स्रोत से नहीं जुड़ती, उसे पेज पर वैसा ही लिख देते हैं, चुपचाप तथ्य बनाकर नहीं।

हाल में जाकर आए हों तो दो बातें हमें बताइए: गेट पर ड्रेस कोड इस वक़्त सख़्ती से लागू है या ढीला, और क्या प्रवेश पर अब कुछ ऐसा माँगा जा रहा है जिसका ज़िक्र इस पेज पर नहीं है।

यात्रा की योजना

नियम आसान हैं। मुश्किल है सुबह 5:30 बजे निकलना, और वह इस पर टिका है कि आप रात कहाँ रुके।

हल्द्वानी और काठगोदाम मैदान में 49 किमी दूर हैं, रेलवे लाइन पर, जहाँ कमरे का किराया जून में भी वही रहता है जो नवंबर में, और सुबह की टैक्सी आसानी से तय हो जाती है।

छोटे जवाब

कैंची धाम के नियमों पर आम सवाल।

कैंची धाम में ड्रेस कोड क्या है?

अगस्त 2023 में मंदिर की ओर से बाहर एक सूचना लगाई गई थी, जिसमें श्रद्धालुओं से अमर्यादित कपड़ों में परिसर में न आने का अनुरोध किया गया है। पूरा नियम बस इतना ही है। सूचना में किसी कपड़े का नाम नहीं है। फटी जींस, नाइट सूट, हाफ पैंट या लोअर गिनाने वाली जो सूचियाँ आपने पढ़ी होंगी, वे देश भर के मंदिरों पर छपी एक आम ख़बर से आई हैं, कैंची धाम की सूचना से नहीं। व्यवहार में कंधे और घुटने ढकने वाले सामान्य कपड़ों में कोई आपको नहीं टोकेगा।

क्या कैंची धाम में फोटो खींच सकते हैं?

परिसर के भीतर नहीं। फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर रोक है, और यह रोक 2023 वाली ड्रेस कोड सूचना से भी पहले की है। जून के मेले में आश्रम प्रशासन इसे दोहराता है और रील बनाने पर भी साफ़ मना करता है। घाटी, नदी, सड़क और बाहर से इमारतें, ये सब आप शौक़ से खींच सकते हैं। रोक भीतर के लिए है, और वहाँ इस पर अमल भी कराया जाता है।

क्या कैंची धाम में मोबाइल ले जा सकते हैं?

फ़ोन साथ ले जाने पर कोई रोक नहीं है। रोक उससे भीतर फोटो या वीडियो बनाने पर है। गेट पर फ़ोन जमा कराने का कोई नियम हमें किसी स्रोत में नहीं मिला, न ही लॉकर या टोकन जैसी किसी व्यवस्था का ज़िक्र कहीं है। अगर कोई पेज लिख रहा है कि आपका फ़ोन गेट पर रख लिया जाएगा, तो पूछने लायक़ सवाल यह है कि उसने यह कहाँ से लिया।

जूते और बैग को लेकर कोई नियम है?

जूते मंदिर क्षेत्र से पहले उतरते हैं, जैसे किसी भी मंदिर में। पास ही उन्हें रखने की अनौपचारिक जगह मिल जाती है। इससे आगे बैग, क्लोकरूम या लॉकर को लेकर कोई प्रकाशित नियम हमें नहीं मिला, इसलिए हम कोई गढ़कर नहीं लिख रहे। भीड़ वाले दिन कम सामान लेकर जाना ठीक रहता है, पर यह सलाह है, नियम नहीं।

15 जून के आसपास क्या बदलता है?

काफ़ी कुछ, पर ज़्यादातर आने-जाने को लेकर। 15 जून मंदिर का स्थापना दिवस है। पिछले सालों में ज़िला प्रशासन ने 14 और 15 जून को हल्द्वानी-अल्मोड़ा हाईवे पर ज़ीरो ज़ोन लगाया है, निजी गाड़ियाँ और टैक्सियाँ भवाली पर रोकी हैं, और आगे शटल बसें चलाई हैं। सड़क किनारे के भंडारे और खाने की गाड़ियाँ बंद करा दी जाती हैं। फोटो-वीडियो की रोक मेले के लिए दोहराई जाती है और ड्रोन पूरी तरह मना रहता है। सामान्य दर्शन करने हैं तो यह पखवाड़ा छोड़ दीजिए।

क्या कैंची धाम में प्रवेश शुल्क या जुर्माना लगता है?

दोनों नहीं। प्रवेश निःशुल्क है, कोई टिकट नहीं है और वीआईपी दर्शन जैसी कोई लाइन नहीं है। ड्रेस कोड तोड़ने पर भी कोई तय जुर्माना कहीं प्रकाशित नहीं है, सूचना एक अनुरोध है जिसके पीछे यह व्यावहारिक बात है कि गेट पर आपको रोका जा सकता है। दान स्वैच्छिक है और परिसर में दान पात्र में ही दिया जाता है।

आगे पढ़ें

कैंची धाम की यात्रा की योजना पर और।

लेखक के बारे में
Meghna Bora, योगदानकर्ता, नैनीताल

Meghna Bora

योगदानकर्ता · नैनीताल · यात्रा और एडवेंचर में रुचि

Meghna Bora नैनीताल में रहती हैं और इस साइट के लिए लिखती हैं। पहाड़ के होटलों, सीज़न के साथ बदलते किराए और अलग-अलग बजट में असल में क्या मिलता है, यह उनका विषय है।

कुमाऊँ की झीलों और धारों में उनकी ख़ास दिलचस्पी है।

कहाँ से नैनीताल, उत्तराखंडविषय पहाड़ के होटल और सीज़न के किराएरुचि यात्रा, ट्रेकिंग, कुमाऊँ की झीलें

पूरा प्रोफ़ाइल → लेख के ऊपर वापस ↑