बागेश्वर में बागनाथ मंदिर और नदी किनारे के घाट, तट पर शिव की बड़ी प्रतिमा और सामने साफ पानी वाली नदी
जनवरी 2027 के बीच

उत्तरायणी मेला, बागेश्वर 2027: सरयू-गोमती संगम पर सर्दियों का मेला

हर जनवरी मकर संक्रांति के हफ्ते में बागेश्वर भर जाता है: बागनाथ मंदिर के पास संगम में स्नान, पहाड़ी दस्तकारी का बाज़ार, नदी किनारे के मैदान में कुश्ती और हर रात मंच पर कुमाऊँनी गायक। 2027 का मेला 14 या 15 जनवरी से शुरू होना चाहिए।

संभावित शुरुआत मकर संक्रांति से, 14 या 15 जनवरी 2027 (1 नवंबर तक तारीखें घोषित नहीं)
पिछले साल 13 से 20 जनवरी 2026, आठ दिन
स्नान बागनाथ मंदिर के पास सरयू और गोमती का संगम; संक्रांति 14 जनवरी 2027 को रात 9:14 बजे
मेला मैदान दुकानों और मंच के लिए नुमाइशखेत; खेलों के लिए सरयू बगड़
हल्द्वानी से 160 किमी, भवाली और अल्मोड़ा होकर कार से करीब 5 घंटे 25 मिनट
इंतज़ाम बागेश्वर जिला प्रशासन

बागेश्वर में बागनाथ मंदिर और घाट, नवंबर 2019। फोटो: ArmouredCyborg, CC BY-SA 4.0, via Wikimedia Commons.

कुमाऊँ का सबसे बड़ा सर्दियों का मेला, बागेश्वर का उत्तरायणी मेला, मकर संक्रांति के आसपास शुरू होता है, जो 2027 में 14 जनवरी को रात 9:14 बजे पड़ रही है, इसलिए सरयू और गोमती के संगम पर मुख्य स्नान 15 जनवरी को होगा। 1 नवंबर 2026 तक जिले ने 2027 की तारीखें घोषित नहीं की थीं। पिछले साल मेला आठ दिन, 13 से 20 जनवरी 2026 तक चला, जिसमें नुमाइशखेत तक उद्घाटन झांकी, विभागों के 33 स्टॉल, सरयू बगड़ में खेल और हर शाम कुमाऊँनी स्टार नाइट हुई। गूगल मैप्स के अनुसार बागेश्वर हल्द्वानी से 160 किमी है, भवाली और अल्मोड़ा होकर कार से करीब 5 घंटे 25 मिनट।

2027 का मेला कब होने की संभावना है

मेला मकर संक्रांति से शुरू होता है, जब सूर्य मकर राशि में आता है और कुमाऊँ में उत्तरायणी और घुघुतिया मनाया जाता है। 2027 में हल्द्वानी के पंचांग के अनुसार संक्रांति का क्षण देर से, गुरुवार 14 जनवरी को रात 9:14 बजे है, इसलिए स्नान का शुभ समय शुक्रवार 15 जनवरी की सुबह 7:07 बजे से है। सरयू के दोनों ओर के परिवार परंपरा से घुघुतिया एक दिन के अंतर पर मनाते हैं, इसलिए दोनों दिन भीड़ रहेगी।

1 नवंबर 2026 तक 2027 की तारीखें घोषित नहीं हुई थीं। पिछले साल जिले ने 19 दिसंबर 2025 को समीक्षा बैठक की और मेला 13 से 20 जनवरी 2026 तय किया, इसलिए 2027 का कार्यक्रम दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में आने की उम्मीद है। आते ही हम इसे यहां जोड़ देंगे।

मेला क्या है

बागेश्वर वहां बसा है जहां गोमती सरयू में मिलती है, शिव के बागनाथ मंदिर के पास, और मकर संक्रांति पर संगम में स्नान ही मेले की सबसे पुरानी वजह है। चंद राजाओं के समय यह माघ मेला बना, और फिर पूर्वी कुमाऊँ की घाटियों का बड़ा सर्दियों का बाज़ार।

सामान आज भी बताता है कि वह किस घाटी से आया है: दानपुर की रिंगाल की टोकरियां और चटाइयां, जोहार और मुनस्यारी के ऊनी कालीन और कंबल, खरही के तांबे के बर्तन, काली कुमाऊँ के लोहे के औज़ार, हिमालयी जड़ी-बूटियां, पहाड़ी संतरे और गन्ना। कुमाऊँनी मास्टिफ नस्ल के पिल्लों के खरीदार भी लंबे समय से यहां आते रहे हैं।

वह मेला जहां कुली बेगार खत्म हुई

बागेश्वर के उत्तरायणी का भारतीय इतिहास में अपना स्थान है। 14 जनवरी 1921 को मेले में अल्मोड़ा अखबार के संपादक बद्री दत्त पांडे के नेतृत्व में जुटे लोगों ने संगम पर शपथ ली कि वे कुली बेगार, यानी दौरे पर आए अंग्रेज़ अफसरों का बोझ बिना मज़दूरी ढोने की मजबूरी, नहीं मानेंगे, और गांवों के कुली रजिस्टर सरयू में बहा दिए। भीड़ के आंकड़े अलग-अलग बताए जाते हैं; सबसे ज्यादा दोहराया जाने वाला आंकड़ा करीब 40,000 है। गांधी जी ने इसे रक्तहीन क्रांति कहा, पांडे जी कुमाऊँ केसरी कहलाए, और जल्द ही यह प्रथा छोड़ दी गई।

2026 का मेला कैसा रहा

2026 का मेला मंगलवार 13 जनवरी को तहसील से नुमाइशखेत मैदान तक झांकी के साथ शुरू हुआ। आगे मेले का निशान था, साथ में ढोल-दमाऊं और छोलिया नर्तक, जोहार सांस्कृतिक समिति और मदकोट के नगाड़े, कलश यात्रा और चौदह स्कूलों के बच्चे। जिला पंचायत अध्यक्ष, स्थानीय विधायक, जिलाधिकारी और एसपी ने झांकी को रवाना किया, और मेलाधिकारी की ज़िम्मेदारी एसडीएम के पास थी। नुमाइशखेत में विभागों के तैंतीस स्टॉल लगे।

प्रकाशित कार्यक्रम में पहली शाम सरयू घाट पर दीपदान; सरयू बगड़ में वॉलीबॉल, पंजा कुश्ती और दंगल; ऐपण, मेहंदी और कुमाऊँनी व्यंजन प्रतियोगिताएं; हर दोपहर स्कूली कार्यक्रम; और हर शाम स्टार नाइट थी, जिसमें इंदर आर्या, ललित मोहन जोशी, माया उपाध्याय और कमला देवी समेत कुमाऊँनी गायक थे। आखिरी रात, 20 जनवरी, देव नेगी समेत बॉलीवुड गायकों और पुरस्कार वितरण के साथ समापन हुआ।

हल्द्वानी से कैसे पहुंचें

1 नवंबर 2026 को गूगल मैप्स ने हल्द्वानी बस अड्डे से बागनाथ मंदिर तक भवाली और अल्मोड़ा होकर कार से 160 किमी और करीब 5 घंटे 25 मिनट बताए। बागेश्वर में रेल नहीं है; सबसे पास का स्टेशन काठगोदाम है। जनवरी में जल्दी निकलें और दिन के उजाले में गाड़ी चलाएं, क्योंकि सर्दियों की सुबह पहाड़ी सड़कों के छायादार मोड़ों पर फिसलन रह सकती है, और मेले के हफ्ते में बागेश्वर शहर में भारी भीड़ रहती है।

हल्द्वानी से बागेश्वर गूगल मैप्स में →

कहां ठहरें

मेले के हफ्ते में बागेश्वर के कमरे जल्दी भर जाते हैं, इसलिए पहले बुक करें या थोड़ा दूर ठहरें। रास्ते में अल्मोड़ा में सबसे ज्यादा विकल्प हैं, और हमारी अल्मोड़ा यात्रा गाइड उसके बारे में है। ट्रेन से आ रहे हैं तो ऊपर जाने से पहले हल्द्वानी में एक रात रुकना मदद करता है:

उसी हफ्ते हल्द्वानी में

अगर आप हल्द्वानी की ओर ठहरे हैं, तो मेले के हफ्ते के शनिवार, 16 जनवरी 2027 को लखविंदर वडाली रामपुर रोड के गोल्डन पाम्स में गा रहे हैं। टिकट और समय हमारे लखविंदर वडाली पेज पर हैं।

जो हम पक्का नहीं कर सके

1 नवंबर 2026 तक जिले ने 2027 की तारीखें, कार्यक्रम या स्टार नाइट के गायकों के नाम घोषित नहीं किए थे, और 2026 के मेले में आए लोगों का कोई प्रकाशित आंकड़ा हमें नहीं मिला। कार्यक्रम आते ही हम यह पेज अपडेट करेंगे। अगर आप बागेश्वर से हैं और कुछ जोड़ सकते हैं, तो hih.editorial@gmail.com पर लिखें।

उत्तरायणी मेले से जुड़े सवाल

2027 में बागेश्वर का उत्तरायणी मेला कब है?

मेला मकर संक्रांति के आसपास शुरू होता है। 2027 में संक्रांति 14 जनवरी को रात 9:14 बजे पड़ रही है, इसलिए मुख्य स्नान 15 जनवरी को होगा। 1 नवंबर 2026 तक जिले ने मेले की तारीखें घोषित नहीं की थीं; 2026 में मेला आठ दिन, 13 से 20 जनवरी तक चला।

मेला बागेश्वर में ही क्यों लगता है?

बागेश्वर वहां बसा है जहां गोमती सरयू में मिलती है, बागनाथ मंदिर के पास, और मकर संक्रांति पर संगम में स्नान मेले की सबसे पुरानी वजह है। आसपास की घाटियों के व्यापारियों ने इसे कुमाऊँ का सबसे बड़ा सर्दियों का बाज़ार बना दिया।

उत्तरायणी का कुली बेगार आंदोलन से क्या संबंध है?

14 जनवरी 1921 को उत्तरायणी मेले में बद्री दत्त पांडे के नेतृत्व में जुटे लोगों ने अंग्रेज़ अफसरों के लिए बिना मज़दूरी बोझ ढोने की प्रथा खत्म करने की शपथ ली और कुली रजिस्टर सरयू में बहा दिए। गांधी जी ने इसे रक्तहीन क्रांति कहा, और जल्द ही यह प्रथा छोड़ दी गई।

बागेश्वर हल्द्वानी से कितनी दूर है?

गूगल मैप्स के अनुसार 160 किमी, भवाली और अल्मोड़ा होकर कार से करीब 5 घंटे 25 मिनट। सबसे पास का रेलवे स्टेशन काठगोदाम है।

उत्तरायणी मेले में क्या खरीद सकते हैं?

बागेश्वर के आसपास की घाटियों की पहाड़ी दस्तकारी: दानपुर की रिंगाल की टोकरियां और चटाइयां, जोहार और मुनस्यारी के ऊनी कालीन और कंबल, खरही के तांबे के बर्तन और काली कुमाऊँ के लोहे के औज़ार, साथ में हिमालयी जड़ी-बूटियां, पहाड़ी संतरे और गन्ना।

क्या उसी हफ्ते हल्द्वानी में भी कुछ है?

हां। मेले के हफ्ते के शनिवार, 16 जनवरी 2027 को शाम 7:30 बजे लखविंदर वडाली हल्द्वानी में रामपुर रोड के गोल्डन पाम्स में गा रहे हैं।

हमने यह कैसे सूचीबद्ध किया

हम स्थानीय इवेंट संपादकीय तौर पर लिस्ट करते हैं और आयोजक नहीं हैं। 2026 की तारीखें और स्टॉल जिले की समीक्षा बैठक पर पहाड़ी संवाद की 19 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट से; उद्घाटन झांकी उत्तराखंड न्यूज़ वाणी की 13 जनवरी 2026 की रिपोर्ट से; और रोज़ का कार्यक्रम, घाटियों की दस्तकारी और मेले का इतिहास 2026 के मेले पर ईकुमाऊँ की गाइड से है। 2027 की संक्रांति का समय हल्द्वानी के लिए गणना किए गए द्रिक पंचांग से है। 1921 का इतिहास कुली बेगार आंदोलन के प्रकाशित विवरणों से है। दूरियां 1 नवंबर 2026 को गूगल मैप्स से। अगर यहां कुछ पुराना हो गया हो तो हमें hih.editorial@gmail.com पर बताएं।

उत्तरायणी के लिए बागेश्वर जा रहे हैं?

सफर हल्द्वानी या काठगोदाम में तोड़ें और दिन के उजाले में ऊपर जाएं।

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