मई-जून की पर्यटक भीड़ से बचना।
भारतीय स्कूलों की गर्मी की छुट्टियाँ मोटे तौर पर 20 मई से 25 जून चलती हैं। तभी नैनीताल भर जाता है, हल्द्वानी के होटल सरचार्ज पर चले जाते हैं, और NH 87 का भवाली वाला हिस्सा पीक पर घंटे भर के लिए जाम हो जाता है। पाँच व्यावहारिक चालें जो सच में काम करती हैं:
1. मिड-वीक चलें। मंगल, बुध और गुरु को वीकेंड का 50 से 60 फीसदी ट्रैफिक, वही नज़ारे, और साफ तौर पर कम होटल रेट मिलते हैं। दो रातों की ट्रिप हो तो मंगल-बुध-गुरु रखें, शुक्र-शनि-रवि नहीं।
2. पहाड़ी डे-ट्रिप के लिए हल्द्वानी से सुबह 7 बजे तक निकलें। 8 बजे तक नैनीताल पहुँचें, 10 बजे से पहले झील की सैर कर लें (अब भी ठंडा, पार्किंग अब भी मुफ्त), 11 बजे तक ब्रंच। वापसी सबसे गर्म घंटों में करें, AC कार, कोई दिक्कत नहीं।
3. लचीलापन हो तो 25 मई से 15 जून का सुपर-पीक छोड़ दें। अप्रैल के पहले दो हफ्ते और जून का आखिरी हफ्ता गर्मी के बैंड का असली स्वीट स्पॉट हैं। रेट सुपर-पीक से 15 से 25 फीसदी नीचे, वही नज़ारे, कतारें काफी कम।
4. वीकेंड डे-ट्रिप पर नैनीताल की जगह सातताल। उतना ही ड्राइव समय, 70 फीसदी कम भीड़, ठंडी जंगल की हवा, प्रकृति-प्रेमी यात्रियों के लिए कहीं दिलचस्प। अधिकतर वीकेंड पर्यटक सीधे नैनीताल जाते हैं और सातताल छोड़ देते हैं।
5. लंच हल्द्वानी में, डिनर पहाड़ों में। दोपहर 1 से 3 बजे अपने AC होटल में लंच आपको शहर की सबसे बुरी गर्मी से बाहर रखता है। शाम को भीमताल या नैनीताल में जल्दी डिनर के लिए ऊपर चलें, 5 से 8 बजे दिन की सबसे फोटोजेनिक रोशनी होती है और डिनर के बाद की वापसी 25 से 28 °C की सुहानी रात की हवा में।